लोकप्रिय होने से बचो !

लोकप्रिय होने से बचो !

लोकप्रियता के खतरे

अतिरिक्त लोकप्रियता भी हानिकारक है।लोकप्रियता का ये अतिरेक मनुष्य के निजी विवेक का अपहरण कर लेता है। और मनुष्य एक विध्वंसक की भूमिका में आ खड़ा होता है। दूसरों के सिर पर हाथ रख कर उन्हें राख करते करते, देर सबेर मनुज खुद के सिर पर भी हाथ रख ही देता है।
दूसरों को हमेशा मुर्ख समझना, अपनी जबान पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना और हमेशा निर्णायक भूमिका में रहना अतिरिक्त लोकप्रियता की चाहना के ही लक्षण है।

 

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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