सौंदर्य क्या है ? सुंदरता क्यों है ? सौंदर्य का क्या लक्ष्य है ?

सौंदर्य क्या है ? सुंदरता क्यों है ? सौंदर्य का क्या लक्ष्य है ?

सौंदर्य को लेकर पूरी दुनिया में अलग अलग व्याख्या हैं। दुनिया के एक हिस्से में गोरा रंग सौंदर्य का प्रतीक है,इसी दुनिया के दूसरे हिस्से में काले ही काले लोग रहते हैं, इसी वजह से वहां पर सौंदर्य के गुणों को गहरे रंगों में ही ढूंढा जाता है।
जहां दुनिया के एक हिस्से में लंबे बाल ,छोटा मुंह ,और शारीरिक लंबाई सौंदर्य का प्रतीक है। वही दुनिया के किसी हिस्से में भारी शरीर और छोटा कद सौंदर्य का प्रतिबिंब है। ऐसे में एक कन्फ्यूजन की स्थिति बनती है कि फिर आखिर सुंदरता क्या है ? और यहां हम शारीरिक सुंदरता की बात नहीं कर रहे हैं, या फिर मनुष्य की सुंदरता की ही बात नहीं कर रहे हैं ।
इस उदाहरण के जरिए हम समझना चाह रहे हैं, कि सुंदरता का गुण वास्तव में है क्या ? जो हमें सिखाया गया है, दुनिया द्वारा बताया गया है, वह वास्तव में सुंदरता का गुण नहीं है। बल्कि सुंदरता का प्रतिबिंब है, एक ओपिनियन है ,जो देश और काल के बंधन में हमें समाज द्वारा समझाई गई है।
जब आप अमेरिका में रहते हैं तब आपके लिए सुंदरता की अलग परिभाषा है। पर जब आप अफ्रीका जाते हैं तो आपके लिए सुंदरता के मायने बदल जाते हैं। लेकिन वास्तविक रूप से सुंदरता है क्या ?
जैसा कि पहले बताया है सुंदरता को हम दो अलग-अलग तरह से देखते हैं । और सबसे लोकप्रिय तरीका सुंदरता के प्रतिबिंब को लेकर है। सुंदरता का प्रतिबिंब देश और काल से बद्ध है। जबकि मौलिक रूप से स्वतंत्र और वैश्विक सौंदर्य अपने आप में एक गुण है। फिर भी हमें गुण को अभी छोड़ देना चाहिए और मनुष्य के मन को ही लेकर सुंदरता को समझने का प्रयत्न करना चाहिए।
क्योंकि गुण ज्ञान की वस्तु है। और मनुष्य की दृष्टि में सौंदर्य को साक्षात करना अनुभव का विषय है। अनुभव के साथ साथ चल कर ही हम ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। यू मान सकते हैं कि अनुभव एक पतला धागा है जिसका सिरा एक अधिक सुदृढ़ अधिक मजबूत और अधिक सत्य ज्ञान की तरफ जाता है।
सौंदर्य वह अनुभव है जिसे महसूस करके हमें अच्छा लगता है। अच्छा लगने का तात्पर्य यह है कि जिसे देखकर और महसूस करके हम अधिक शांत रहते हैं। अधिक स्थिर रह जाते हैं। और कुछ क्षणों के लिए हम अपने अहम से अपने आप को मुक्त पाते हैं।
यह स्थिरता, यह शांत अवस्था, यह अहम से क्षण मात्र की ही मुक्ति हमें स्वतंत्रता का आभास करवाती है। हमें शुभता का एहसास होता है, और हमारे मन तक एक संदेश जाता है जिसे महसूस करते हुए हम प्रकृति और अपने साथ एक संगता का आभास करते हैं।
हमारे अनुभव से सौंदर्य का यह साक्षात्कार हमें यह महसूस करवाता है, कि इस सृष्टि में कुछ बाहरी तत्व ऐसे हैं जो हमें अपने आप से जोड़ते हैं। सौंदर्य भी एक ऐसा ही तत्व है जो हमें अपने भीतर के सद्गुणों से साक्षात्कार करवाता है। यह तो अनुभव की बात हम यहां देखते हैं , कि सौंदर्य जरूरी नहीं है कि सिर्फ वस्तुओं में अथवा व्यक्तियों में ही हो । सौंदर्य का प्रसार प्रकृति में भी है।
इसी वजह से हम सौंदर्य की खोज करते करते नदियों और झीलों के किनारे जाते हैं। जंगलों में घूमते हैं , पहाड़ों में विचरते हैं, और एक मूल तत्व अथवा अनुभव जो हम शिद्दत से महसूस करते हैं । वह यह है की पर्यटन के दौरान हम अपने आप को और अधिक शांत, और अधिक स्थिर , और भी अधिक स्वतंत्र महसूस करते हैं। इसका अर्थ तो यह हुआ की सौंदर्य या सुंदरता देहातीत है। मनुष्य के शरीर से अतीत है।
प्रकृति की सौम्यता और रम्यता में थोड़ा और गहरा जाएंगे तो यह अनुभव कर पाएंगे , कि सुंदरता देश और काल के परे भी है। अर्थात दुनिया के किसी भी हिस्से में चले जाइए अगर आपके भीतर सौंदर्य का जागृत बोध है, तब यह बोध आपको किसी भी सुंदर वस्तु, सुंदर दृश्य, अथवा सुंदर व्यक्ति में सौंदर्य का साक्षात करवा देगा।
सौंदर्य अनुभव से शुरू होता है। और एक विचार तक आपको ले जाता है।
क्या सौंदर्य का इतना ही काम है कि आपको अच्छा महसूस करवाएं ? आपको थोड़ी देर के लिए शांत और स्थिर महसूस करवाएं ? या फिर सौंदर्य का अपना कोई गुण भी है ?
हां! सौंदर्य एक रास्ता है। यह रास्ता शांति और स्थिरता का पथ है। जो आपको एक तत्व से अपने आप से जोड़ता है। सुंदरता को अभ्यास करते करते महसूस करते करते , आप स्वयं को उस स्थित स्थिति में पाते हैं जहां आप की स्वतंत्रता आपके साथ हर क्षण रहती है हर क्षण आप उस बोध से अपने आप को भरा हुआ पाते हैं। जहां सुख और दुख नहीं होते हैं। जहां जड़ता नहीं होती है। जहां अटूट प्रेम का स्त्रोत है। जहां ऊर्जा का निर्बाध बहाव है।
सौंदर्य की व्यक्तिनिष्ठ नही है, आपको व्यक्तियों पर नहीं रुकना है। सौंदर्य की बहुत सारी अग्रगामी परिभाषाएं, बोध और अनुभव है। जो हमें अपनी समस्याओं से, बंधनों से मुक्त करते हैं, वहां तक जाना है तब तक रुकना नहीं है। और हर पल, हर क्षण इस सौंदर्य के रास्ते अपनी मुक्त चेतना का अनुभव हमें यह याद दिलाता रहेगा कि हम सच्चे रास्ते पर हैं।

Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *