प्यारे दोस्त, तुम कमाल हो

प्यारे दोस्त, तुम कमाल हो

प्यारे बच्चे,
तुम्हारी उम्र कम है अभी। इस उम्र में तुम बहुत सोचते हो। तुम्हे अपने दोस्तों की फिक्र होती है। उनकी छोटी छोटी चीजो के बारे तुम सोचते हो। तुम्हे फैशन का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे कपड़ो का नया पैटर्न कौनसा चलन में है, बाल कैसे कटवाने है, शेव कैसी रखनी है। आदि आदि।
तुम्हे शायद मालूम नही, लेकिन इन चीजों को करते हुए तुम बहुत ऊर्जा में रहते हो। बूढो को क्या मालूम कि तुम्हारी उम्र में कितनी मौज है।
तुम ऐसे ही खुल कर हँसते रहो। तुम ऐसे ही जम कर भागदौड़ करते रहो। तुम ऐसे ही अपने दोस्तों की फिक्र करते रहो। तुम अच्छा कर रहे हो। तुम्हे देख कर लगता है कि ये उम्र हमारी भी लौट आये वापस, तो हम भी जिंदगी का रस फिर से पी लेवे।
और सुनो बच्चे ! तुम इतना बिजी रहकर भी पढ़ने के लिए वक्त निकाल लेते हो। ये बड़ी गजब की बात है।

तुम्हारा दोस्त
रतन जीत

Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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