पिता

पिता

पिता !
पिता, हमारी आवाज में छुपा हुआ रूमानी जादू। पिता ; हमारे इश्क का हसीन नगमा। पिता ; हमारी जिंदगी के उजाले का लम्हा। पिता ; औसत सा दिखने वाला वो शख्स जिसे छू कर ही कोई पारस हो जाये। पिता ; हमारे मुकद्दर के सिकन्दर।

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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