जो लड़का सेना में भर्ती नहीं हो पाया था,उसने उप जिला कलेक्टर बन कर ही सांस ली

जो लड़का सेना में भर्ती नहीं हो पाया था,उसने उप जिला कलेक्टर बन कर ही सांस ली

जो लड़का सेना में भर्ती नहीं हो पाया था,उसने उप जिला कलेक्टर बन कर ही सांस ली 

परसों एक लड़का कॉलेज आया. तब मै खाना बना रहा था. वो सीधा रसोई में ही आ गया. बोला सर मदद करूँ क्या ? मैंने कहा नहीं यार. तू बता कैसे आया है. उसने कहा कि दो दोस्त है साथ में , उनका एडमिशन करवाने आया था.

मैंने बोला, ठीक है तुम बैठो. थोड़ी देर में आता हूँ.

ऑफिस में पहुंचकर उन लड़कों को बैठाया और सामान्य हाल चाल पूछकर बात को आगे बढानी शुरू की. जो लड़का एडमिशन के लिए साथ में आया था. वो बोला कि सर कॉलेज ज्यादा नहीं आ पाउँगा. घर पर काम है खेती का. मैंने देखा कि लड़के के परसेंटेज तो ठीक है. लेकिन थोडा भ्रमित है शायद.

उससे पूछा कि यार एक बात बता, तुझे क्या लगता है. तू नौकरी नहीं लग पायेगा , या लग जाएगा नौकरी.

वो थोडा अचकचा गया.

मैंने बोला देख, एक कहानी सुनाता हूँ.

मेरा एक दोस्त है. विकास पंचोली. उस ने बाहरवीं क्लास के बाद सेना में भर्ती होने के लिए फ़ार्म भरा. दौड़ की बढ़िया प्रेक्टिस की. और दौड़ में पास भी हो गया. लेकिन जब मेडिकल हुआ. तो वो मेडिकल में अनफिट हो गया.

उसे खुद पर बहुत विश्वास था. उसने नर्सिंग डॉक्टर बनने के लिए एक साल कोटा रहकर कोचिंग की. लेकिन बहुत कम नम्बरों से रह गया. घर में आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं थी. तो आगे कोचिंग कर ही नहीं पाया. पिता जी से भी वादा था कि एक साल कोचिंग करवा ही दीजिये. सलेक्ट नहीं हुआ तो आप कहेंगे वो कर लूँगा.

नर्सिंग में एडमिशन लिया भाई ने. अच्छे से पढ़ाई की. और एम्स में सलेक्ट हो गया.

लेकिन आदमी में कुछ करने की मंशा रहती है न. तो वो अपने ही आगे बेबस हो जाता है. सपना इंसान को रास्ता दिखाता है. वो वापस राजस्थान आ गया. यहाँ उसकी तनख्वाह दिल्ली एम्स के अनुपात में बहुत कम थी. देखो उसे उस समय पैसों की जरुरत भी थी. लेकिन उसके मन में पल रहे सपने को सिर्फ उसके निर्णय की जरूरत थी.

विकास ने निर्णय ले लिया, कि वो राजस्थान में ही नौकरी करते हुए आगे की तैयारी करेगा. उसने पुलिस सब इंस्पेक्टर का एग्जाम दिया. लेकिन वो सफल नहीं हो पाया.

और मालूम आगे क्या हुआ ?

उसने और अच्छे से तैयारी की. राजस्थान सिविल सेवा की परीक्षा दी. और आज वो जिला उप कलेक्टर है. विकास आज क्या कहता है मालूम है ? वो कहता है, कि उस रोज सेना में मेडिकल में फिट हो जाते तो आज उप जिला कलेक्टर नहीं बन पाते यार.

उस लड़के को यह समझाते हुए मैंने कहा, तुम एक काम करों मुझे मत बोलो, लेकिन अपने घरवालो को यह बोल दो कि पढ़ाई करूँगा, तो घर में काम में इतना ध्यान नहीं दे पाउँगा.

मालूम तुम्हे, खेती घाटे का सौदा है. खेती से गुजारा ही चलता है. लेकिन पढ़ाई लिखाई करोगे तो घर ही नही दोस्त और रिश्तेदारों को भी फायदा मिलेगा. क्यूंकि जब हर महीने दो तारीख को सेलेरी का मेसेज आता है फोन पर. तब इंसान बेफिक्र हो जाता है.

लड़का सुनता रहा. उसे विकास के जीवन की कहानी ने प्रभावित कर दिया. होता है ना. हमारे आसपास ही हमारे हीरो रहते है. जो बहुत कोशिशो के बाद मुकाम हांसिल करते है.

विकास शुरू से ही जुझारू व्यक्ति है. उसका व्यक्तित्व करिश्माई है. करिश्माई इस लिहाज से कि क्रिकेट खेलते वक्त वो कभी हार नहीं मानता था. कभी उसने खेलते वक्त लापरवाही से अपना विकेट नहीं गवाया. कभी वो इस तरह से नहीं खेला कि बस समय गुजारना है. उसके खेल में उसका व्यक्तित्व झिलमिलाता था.

और आज भी वो जहाँ भी है, वहाँ अपनी जागरूकता और कर्मठता से अपने काम को बेहतर तरह से करता है.

हमारी कहानी के नायक ऐसे ही है. सीधे साधे. लेकिन जीवटता से भरपूर.

(फोटो : श्री विकास पंचोली )

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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