आईएएस मेंस परीक्षा में उत्तर कैसे लिखे ?

आईएएस मेंस परीक्षा में उत्तर कैसे लिखे ?

आईएएस मेंस परीक्षा में उत्तर कैसे लिखे ?

आईएएस/ यूपीएससी और स्टेट सिविल सेवा की मुख्य परीक्षाओं में उत्तर लिख कर देने होते है.

लिखित परीक्षा का सबसे रोचक पहलू यह होता है कि किसी अभ्यर्थी को कितने आंकड़े और तथ्य याद है, इससे ख़ास फर्क नहीं पड़ता है. फर्क इस बात से पड़ता है, है कि परीक्षार्थी ने कितने शक्तिशाली तरीके से अपने उत्तर को लिखा है. यहाँ यह बात नहीं कही जा रही है की बिना पढ़े या कम पढ़े भी अच्छा उत्तर लिखा जा सकता है. बल्कि यह कहने का प्रयत्न किया जा रहा है, कि समान रूप से परिश्रम करने के बाद भी दस परीक्षार्थियों के अंको का अंतर दस अलग अलग स्तरों का होता है.

और यही वजह है कि बेहद कड़ी प्रतियोगिता के बीच वही अभ्यर्थी सफल हो पाते है जो अपने उत्तर को सटीक, स्पष्ट और प्रभाविक तौर पर लिख पाते है.

उत्तर लिखना अभ्यास और कौशल की विषयवस्तु है. आप लिखने की कला पर हजार सेशन देख लें, सौ आर्टिकल पढ़ लें. लेकिन आपका उत्तर तभी प्रभावशाली बनेगा जब आप उसका अभ्यास करेंगे. और अभ्यास भी निरंतर करेंगे.

उत्तर लिखने की कुशलता और लेखन शैली के अभ्यास के लिए स्पष्ट नीति क्या होनी चाहिए ?

– पहली बात तो यह है, कि आप जब सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे है. तो आप को यह बात ध्यान में होनी चाहिए कि लिखने का अभ्यास आपको करना ही है. बिना इस अभ्यास के आप यह परीक्षा सफलता पूर्वक पास नहीं कर पाएंगे.

– अधिकांश अभ्यर्थी प्रीलिम्स परीक्षा के बाद थोडा बहुत लेखन का अभ्यास करने लगते है. और प्रीलिम्स का परिणाम आने के बाद लेखन का अभ्यास द्रुतगति से शुरू करते है. परीक्षा में सफलता के लिहाज से ये दोनों ही बाते गम्भीर तौर पर गलत है. असंगत है. लेखन एक कौशल है, और कौशल अभ्यास से विकसित होता है.

– अभ्यर्थी अपने लिखे उत्तरों को अपने साथियों से जांच करवाते है. यह रणनीति भी ठीक नहीं है. आपके साथी को मेंस परीक्षा लिखने का अनुभव हो तो ठीक बात है, लेकिन नये नवेले अभ्यर्थियों से उत्तर की जांच करवाना स्पष्ट रणनीति नहीं है.

– उत्तर लिखने की कुशलता को नियमित तौर पर निखारने के लिए, प्रीलिम्स की तैयारी के साथ साथ ही अभ्यास के तौर पर नियमित करना चाहिए. आप अलग अलग विषयों पर, रोज कम से कम सौ शब्द लिखना शुरू कीजिये.

– लेखन के लिए अलग से एक अलग डायरी या रजिस्टर बनाना ज्यादा उचित होगा.

– लिखने के अभ्यास करने से यही अर्थ नहीं है, कि आप परीक्षा सम्बन्धी सामग्री पर ही लेख लिखे. समानांतर तौर पर रचनात्मक लेखन का अभ्यास भी आवश्यक है. इससे आपकी शब्द-शक्ति में सहज रूप से बढ़ोतरी होती है. और निबन्ध जैसे प्रश्नपत्र में आप अपनी मौलिकता को ठीक से प्रदर्शित कर पाते है.

-मेंस के समय लेखन का अभ्यास आवश्यक है. इन दिनों में प्रश्नपत्र की प्रकृति के अनुसार तय शब्द सीमा में लेखन का अभ्यास आपकी तैयारी को पुख्ता आधार देता है.

निरंतर अभ्यास कीजिए. रचनात्मक विषयों पर निरंतर लिखिए. सरल शब्दों में अपनी बात को लिखिए.

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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