आईएएस ही क्यों बनना चाहते हो दोस्त ?

आईएएस ही क्यों बनना चाहते हो दोस्त ?

आईएएस ही क्यों बनना चाहते हो दोस्त ?

अच्छा आप सिविल सेवा की तैयारी कर रहे है !

दोस्त जिन्दगी में बड़े लक्ष्य रखना अच्छी बात है. आपके भीतर उर्जा है, उल्लास है. कुछ कर गुजरने का जूनून है.

लेकिन एक बार अपने आप से यह जरुर पूछिए कि आप इस सेवा में जाना क्यों चाहते है ? इस सवाल का जवाब जितना सरल और स्पष्ट होगा, उतना ही आपके लिए ये तैयारी आसान हो जाएगी.

लालबत्ती, इज्जत, पावर जैसी बातों को कुछ क्षण के लिए बाजू में रख दीजिये. और सोच कर खुद को बताइए कि आपका असली मकसद क्या होना चाहिए! एसी कौनसी बात है जो आपको हमेशा के लिए एक कारण दे सकती है, इस सेवा का हिस्सा बनने के लिए.

यह सवाल मै क्यों पूछ रहा हूँ ?

दो तीन वजह है.

पहली और जरुरी वजह तो यही है कि मै आपकी सहायता करना चाहता हूँ. मै चाहता हूँ कि आप वैसे इंसान नहीं बने कभी, कि सिविल सेवा में नहीं जाने का मलाल आपके भीतर रह जाए. और आप अक्सर यह याद करें, कि आपने भी कभी आईएएस बनने की कोशिश की थी.

दूसरी वजह यह है कि जब आप आईएएस का हिस्सा बन जाएँ तब उस समूह में भी आप एक बेहतर नौकरशाह बन कर उभरे.

तीसरी वजह यह है कि आप अगर किसी वजह से आईएएस नहीं बन पायें भी, तो आपको यह पश्चाताप परेशान नहीं करें, कि काश सही समय पर सही निर्णय ले लिया होता. तो ठीक ठाक सी जगह पर होते आज ! यानी समय रहते इस जूनून से मुक्त हो जाते, तो शायद इतनी परेशानी में नहीं होते.

देखिये. मोटिवेशन एक बुरी चीज है, अगर वो बाहर से आ रही है. और आपको रोज रोज मोटिवेट होना पड़ रहा है. और मोटिवेशन अच्छी चीज है, अगर उसे लेने के लिए आपको बाहर के किसी भी साधन की तरफ रोज रोज ताकना नहीं पड़ रहा.

इसीलिए, पूछ रहा हूँ. वो क्या बात है, जो आपको सिविल सेवा में जाने के लिए मोटिवेट कर रही है.

आपके पास कोई भी कारण हो, अगर वो कारण स्पष्ट है, तो यकीन मानिये आप इस दफा जरुर ये परीक्षा पास कर लेंगे. और अगर ! आप पाते है कि आपके पास यूँ कोई स्पष्ट वजह है ही नहीं, तो आप जल्दी से इससे मुक्त होकर अपने लिए एक बेहतरीन रास्ता बना लेंगे.

लोग सफल क्यों नहीं होते ! क्यूंकि वो असफल हो जाते है. परीक्षा के लिहाज से वो सफल नहीं हो पाते है. तो इसकी बड़ी वजह यही है, कि चीजे स्पष्ट नहीं हो पाती है उस दौर में.

आपकी अवस्था को थोड़ी सी आसान करने की कोशिश करता हूँ.

  1. आप पॉवर के लिए आईएएस करना चाहते है- सिर्फ पॉवर के लिए आईएएस करना चाहते है. तो फिर से सोचिये. पहली बात तो यह कि पॉवर लेने की कोशिश वो लोग करते है, जिन्हें कुछ गलत सलत करना है. सही चीजे करने के लिए किसी भी तरह की बाहरी पॉवर हांसिल करने की जरुरत ही नहीं पड़ती है.

और दूसरी बात यह है कि किसी सिविल सेवक में अल्टीमेट पॉवर होती भी नहीं है. हाँ ! नीचे के तबके का आदमी यह जरुर मानता है कि सिविल सेवक के पास पॉवर होती है. असलियत में तो खुद सिविल सेवक अफसरशाही के एक ढांचे में बंधा हुआ व्यक्ति है. जिसके पास पॉवर से ज्यादा जिम्मेदारियां है. बहुत सी उसकी दिक्कते और कमिटमेंट्स होते है. ऐसे सिविल सेवक जो संतुलन नहीं बैठा पाते, दुर्भाग्यवश आत्महत्या भी कर लेते है.

यानी ये सेवा पॉवर एक्सरसाइज का जरिया नहीं है.

आप सिविल सेवा में जाना चाहते है, क्यूंकि आप सेवा करना चाहते है-

यह स्टेटमेंट बड़ा प्रचलित है. जब ऐसा है कि सिविल सेवा में जाने से सेवा का मौका मिल जाता है. तो आपको ऐसे बहुत से उदहारण क्यों नहीं मिलते है! क्या सिविल सेवा में जाने के बाद सभी लोग यह भूल जाते है, कि उन्हें सेवा करनी है.

ऐसा नहीं है. आप सेवा का अर्थ समझिए. सेवा बिलकुल अलग चीज है. बाबा आप्टे को पढ़िए थोड़ा. या कभी मदर टेरेसा को समझिये. या यूँ कीजिये, आपने कभी न कभी किसी की सेवा की ही होगी. तो उस समय की आपकी मनःस्थिति को महसूस कीजिये. आप समझ जायेंगे, कि नौकरी करना सेवा करने से अलग चीज है. ठीक है, कोई सिविल सेवक अपनी प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल करके कभी कुछ कर देता है, तो उसे सेवा नहीं चमत्कार कहिये.

आप पूछेंगे कि फिर सिविल सेवा में सेवा शब्द का इस्तेमाल क्यों किया जाता है. तो भाई ऐसे बहुत से पुछल्ले शब्द है, जिनका बेजा इस्तेमाल हो रहा है. श्याम लाल नाम में पीछे लाल क्यों लगाते है ! आप भी नहीं बता पाएंगे.

समाज में प्रतिष्ठा के चलते आप सिविल सेवक बनना चाहते है –

इस स्टेटमेंट की आलोचना भी ठीक उसी तरह की जा सकती है, जैसे ऊपर के स्टेटमेंट की दुर्गति हुई है. लेकिन आप समझिए. समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए सिविल सेवा ही एक मात्र रास्ता नहीं है.

आप थोड़ी और आँखे खोलकर देखेंगे तो पाएंगे कि बहुत से और भी सुलभ रास्ते है. जिनपर चल कर प्रतिष्ठा अर्जित कर रहे है लोग. आप भी कर सकते है.

अच्छा, कहीं आप इन वजहों से तो सिविल सेवक नहीं बन रहे है ?

  • दोस्तों में अपनी धाक जमाने के लिए – ये बात बड़ी अजीब लग सकती है. लेकिन मानव अपने समूह में उतरोत्तर पहचान बनाना चाहता है. इसी बात को हमने यहाँ ‘धाक’ कह दिया. अगर आप धाक के लिए बड़ी नौकरी पाना चाहते है. तो ये ईमानदारी से स्वीकारी जाने वाली बात है. कोशिश कीजिये, आपके दोस्त आपका स्वागत करने को खड़े है. यकीन मानिये, जब आप आईएएस या सिविल सेवक बन जायेंगे. उन्हें बहुत ख़ुशी होगी.
  • अपने आप को साबित करने के लिए– जिसका जैसा मन होता है. वह वैसे ही अपने आप को साबित करना चाहता है. साबित कीजिये. बस यह ध्यान रहे कि आप के इस जूनून के पीछे आपका व्यक्तिगत, सामाजिक जीवन स्थाई तौर पर प्रभावित नहीं हो रहा हो. साबित ही करना है. तो रोज साबित कीजिये. अच्छे से तैयारी करके. और नहीं हो पा रहा है, तो छोड़ कर निकल लीजिये. कहीं और साबित करेंगे, चलिए.
  • बस तैयारी कर रहे है, देखते है बनते है या नहीं आईएएस- आपके आईएएस बनने के चांस सबसे बेहतर है. क्यूंकि आप का ध्यान तैयारी पर है. आप मुक्त है किसी भी तरह के बाहरी विचार, या संवेग से. कीजिये तैयारी. अच्छे से कीजिये.

उम्मीद है आप अपने आप से सरलता और स्पष्टता से पूछेंगे, कि मै सिविल सेवक क्यों बनना चाहता हूँ. और इस सवाल का जवाब जितना जमीनी और सरल होगा. आपकी तैयारी उतनी ही अच्छी चलेगी.

क्यूंकि आप अन्दर से मोटिवेट रहेंगे.

इतनी सी ही बात है.

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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