हर हाल में हालात बदलने की उम्मीद

हर हाल में हालात बदलने की उम्मीद

हर हाल में हालात बदलने की उम्मीद

उसे हर हाल मे हालात बदलने की उम्मीद थी । कर्कश चिंघाड़ो के बीच उसने घावों को भरते देखा था ।

रमते रमते जोगियों के पाँवों को मकसद तक जाते देखा था ,कमजोर यादों को जड़ होते देखा था । दूब को बेमतलब उगते देखा था । उसने देखा था की किस तरह जानी दुश्मन दोस्त हो जाते है ,खेतों मे पानी आते ही पौधे हरे हो जाते है ।

वो समय काल और परिस्तिथियों का दृष्टा होकर कई बार काल खण्डों से गुजर आया था -ठीक सनातन कालयात्री की तरह । उसे मालूम था की कालरात्रि का अर्थ सिर्फ घुप्प अँधेरा नहीं होता ।

वो जानता था की रोशनदान को चीर कर आने वाली पहली किरण अपने साथ उजाले के भ्रूण ले कर आती है ।इसी लिए वो सुबह ध्यान करता और रात को प्रार्थना ,समय को बदल देने के लिए नहीं बल्कि बदले हुए समय को देख पाने का शुक्रिया अता करने के लिए ।

इसी लिए उसके गीतों में विरह की छाप है मगर मिलन के उन्माद के साथ ।

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Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

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