एक लड़की का दूसरी लड़की को खत

एक लड़की का दूसरी लड़की को खत

एक लड़की का दूसरी लड़की को खत

ये खत एक लड़की लिख रही है। खत लिखने वाली लड़की कैसी है, लिख किसे रही है, क्यों लिख रही है ! ये सब बातें आपको इस खत में ही मिलेगा।

प्रिय बहन,
आज मौसम में ठंडक है। दिसम्बर आने वाला है, और सर्दी दिनों दिन बढ़ रही है। पता नही इस साल कितनी सर्दी पड़ने वाली है। लोग कह रहे है कि इस बार सर्दी तेज रहेगी।
लोग ये बात हर साल दोहराते है ना। पता नही क्यों लेकिन सर्दी के आने की आहट से लोग अक्सर घबरा जाते है। शायद इसलिए, क्योंकि उन्हें बच्चों के बीमार होने का भय सताता होगा।
बच्चे बीमार नही होते है। बच्चे बीमार करार कर दिए जाते है। लेकिन दुनिया की रवायत ही कुछ ऐसी है बहन , कि जिस चीज का अर्थ पूरी तरह मालूम नही होता है। उस बात के लिए किसी पर आरोप लगा देते है लोग।
कल ही बात लो, मैं ऑफिस से लौट रही थी। लौटते वक्त कुछ फल लेने की बात सूझी। फल वाले के पास रुक कर फल छांट रही थी ही, कि फल वाला बोल पड़ा ; दीदी ये मत लीजिये। ये अमरूद सड़ गया है।
मेरा ध्यान उसी वक्त उसकी बात पर गया। क्या अमरूद वास्तव में खुद सड़ा है ? क्या अमरूद ने खुद चाहा था कि वो सड़ जाए। क्या ऐसा नही हुआ है, कि अमरूद का फल प्राकृतिक तौर पर अपनी अगली अवस्था की तरफ बढ़ गया है।
लेकिन ऐसा नही कहा जा सकता है। क्योंकि अमरूद हमारे काम का नही रह गया है। इसी वजह से हमने उसी पर आरोप रख दिया कि वो खुद ही सड़ गया है।
लड़कियों की जिंदगी भी कुछ कुछ अमरूदों जैसी ही होती है। वे खुद ही खराब हो जाने की हद तक आरोपित की जाती है अक्सर। ऐसा नही होना चाहिए न। लेकिन होता है, लोग करते है ऐसा।
तुम्हारी बेटी के लिए कह रही हूँ, उसके साथ जो कुछ भी हो आगे के जीवन मे। प्लीज अपनी बेटी पर आरोप मत लगाना, वरना तुम्हारे और उस फल वाले में क्या अंतर रह जायेगा ! फलवाला तो फिर भी अपना पेट पालने के लिए अमरूद बेचता है। हम लोग तो किसी भी फायदे के लिए बेटियों को बड़ा नही करते है ना, समाज को खुश करने के लिए हम अपनी संतानों का लालन-पालन नही करते है। और करते हो, तो हम पर हजार लानतें है।
लेकिन ये सब समझना इतना आसान नही है। दैनिक रूप से हमें अभ्यास करना होगा। हम औरतों को खुद को रोज टटोलना पड़ेगा। और अपनी बेटियों के सामने ठीक से पेश आना होगा।
मैं अपनी बेटी के लिए एक और कोशिश करना चाहती हूँ।
मैं चाहती हूँ कि उसका अपना स्पेस हो। एक ऐसी जगह हो उसकी अपनी, जहाँ वो अपनी अभिव्यक्ति को बाहर निकाल सके। पहले पहल में सोचती थी, कि सोशल मीडिया ने लड़कियों को अभिव्यक्ति का स्पेस दिया है। लेकिन बाद में समझ आया कि इस जगह पर उसका दिमाग आजादी को महसूस नही कर पाता। लड़कियों के सामने यहाँ भी तमाम तरह की दिक्कतें है।
बहन ! क्यों न हमारी बच्चियों के लिए एक अलग से कमरा हो। जानती हूँ, ऐसा सम्भव नही है। क्योंकि हमारे घर लगातार सिकुड़ते जा रहे है। लड़कियों के लिए कमरा तो दूर की बात है आज, उनके लिए बिस्तर भी नही है खुद के। यहाँ वहाँ लेट जाती है वो। इसी वजह से खुद के लिए ठीक से सोच भी तो नही पाती है। शादी के बाद भी वो अपने पति के कमरे में रहती है। फिर बच्चे हो जाते है, तो वो अपने स्पेस के बारे में तो करीब करीब भूल ही जाती है।


मै अपने कमरे में रहकर इतनी बाते इसलिए कह पा रही हूँ, क्योंकि इस कमरे में मुझे यकीन महसूस होता है। मुझे लगता है कि इन दीवारों ने मुझे सुरक्षा तो दी ही है, साथ ही इनपर टँगे हुए कपड़े और तस्वीरें मेरे होने के बोध को मजबूत करते है। मेरे कमरे की छत मेरा छोटा सा आसमान है, जिसकी तरफ़ मुँह करके मैं ढेर सारे सपने देख सकती हूँ। अपनी बेटियों के लिए हम हमेशा मौजूद नही रह सकते, लेकिन मेरी प्यारी दोस्त ! उन्हें कमरा दे कर हम उनके लिए ढेर सारी सुरक्षा और आत्मविश्वास बो सकते है। हम इस तरह उनके साथ हमेशा हो पाते है।
प्यारी मित्र, तुम मेरी सखी हो। सहेली हो। बहन हो। मेरी बात पर गौर ही नही करना, बल्कि मेरी बातों पर अपनी राय भी बताना।
और यह भी बताना कि अगर इतनी आज़ादी तुम्हारे पास होती बचपन मे। तो तुम आज किस तरह से चीजों को देखती। तुम्हारी चेतना कितनी उन्नत होती।
यहाँ बेटा और बेटियां ठीक है। खुश है। उम्मीद है तुम्हारे बच्चे भी ठीक होंगे।
खत का जवाब देना, जब वक्त मिले। और खुद के लिए वक्त जरूर निकालना।
अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना प्रिय सखी।
शेष मंगल।
तुम्हारी साझी दोस्त,
सखी।

यह भी पढिये, आपको अच्छा लगेगा गेँहू और गुलाब की कहानी

 

Ratanjeet

रतनजीत गुर्जर इस ब्लॉग के फाउंडर और सम्पादक है। इतिहास और दर्शनशास्त्र विषयों से यूजीसी नेट है। और अभी स्वामी विवेकानंद कॉलेज, गोठड़ा में संयुक्त निदेशक तथा असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते है। यारी-दोस्ती में ढाबे पर बैठना अच्छा लगता है। सो इस ब्लॉग वेबसाइट का विचार भी वही से बन गया। दोस्तों की सद्भावना का ही असर है कि ये ब्लॉग नमूदार हो उठा।

2 thoughts on “एक लड़की का दूसरी लड़की को खत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *