About us

हमारें बारे में : 
वेबसाईट को एक सामान्य सा व्यक्ति चलाता है. नाम है रतनजीत.
यह आदमी कॉलेज में पढ़ाता है, और इतिहास तथा दर्शनशास्त्र में यूजीसी नेट है.
लेकिन ठहरिये , आदमी कोई भी हो. नेट हो या कुछ. डिग्रियों से इतना फर्क नहीं पड़ता जितना फर्क इस बात से पड़ता है कि उसके साथ वाले लोग कैसे है. उनका योगदान महत्त्व रखता है.
हिंदी ढाबा डॉट इन के सामने आने में भी कोई डिग्री काम नहीं आई. लेकिन ऐसे दोस्त जरुर काम आयें जिनमे डिग्री है. जिनमे ग्रेवेटी है, जिनमे दरवाजा खोलने की बारम्बारता है.
पहला दोस्त : ढाबे पर एक छोटू होता है न, जिसकी आँखे खूबसूरत होती है, बाल रेशमी होते है और बातें जमाने भर की होती है. हमारी दुनिया में भी एक छोटू है, जिसे हमने कहा कि छोटू चाय ला. मगर छोटू कमबख्त वेबसाईट का आइडिया ले आया. इस आइडिया फाउंडर को दुनिया कपिल देव तिवाड़ी कहती है. और वो खुद को देव कहता है.
आप इतना समझ लीजिये कि आगे जो भी सकारात्मक बदलाब दिखेंगे इस वेबपेज पर सब छोटू की ही कारस्तानिया होगी. हम चाय मंगवाएंगे वो हमेशा कुछ आइडिया लेकर लौटेगा.
दूसरा दोस्त : इसका नाम लोकेश गुर्जर है. लड़का जिद्दी है. कमिटेड है. राख से बारूद बनाने का हुनर रखता है. लेकिन तहजीब हाफी की तरह कहता है कि ,
पराई आग पर रोटी नहीं बनाऊंगा, मै भीग जाऊंगा मगर छतरी नहीं बनाऊंगा.
अगर खुदा ने बनाने का इख़्तियार दिया ,अलम बनाऊंगा बरछी नहीं बनाऊंगा.
वेबसाईट टोटल लोकेश ने ही बनाई है, और लोकेश क्या क्या बनाएगा यह या तो ईश्वर जानता है या फिर लोकेश खुद.
तीसरा दोस्त : पुखराज ! जी नाम भी और काम भी दोनों पुखराज.
वेबसाईट आइडिया को सपोर्ट किया भाई ने. पूरी बात सुनी, और सुनता ही चला गया. मुझे लगता है ब्रह्मांड के हाथ , पैर, नाक  आदि हो न हो कान जरुर होते होंगे. और ये कान हर रचनाधर्म को सुनते होंगे. सुनकर ही रचना को पोषण मिलता है.
पुखराज इस वेबसाईट का कान है यानी न्यूट्रीशन है.
अब थोडा वेबसाईट के बारे में –
ये ऑनलाइन ढाबा है साहब। ऑनलाइन है तो आपको खाना पीना तो नही मिलेगा यहाँ। 
लेकिन हाँ ! ढाबे पर बैठकर जो सुकून मिलता है बाते करते हुए, वो मिल सकता है आपको यहाँ। 
हिंदी में ढ़ाबेबाजी मिलेगी इधर आपको। 
जैसे आपकी हेल्थ को लेकर कुछ जानकारियाँ और सलाह मिलेगी। पैसे टके और रोजगार के बारे में सपाट बाते यहाँ होती है। तो मोटिवेशन भी मिलेगा, लेकिन चाय की तरह चुस्कियों में। 
आपके सवाल और समस्याएं है ही, तो उनपर भी पंचायती होती है यहाँ। लेकिन बाबागिरी की तरह नही, दोस्ती दोस्ती में। आप को समझ मे आये जवाब तो देख लीजिए, लेकिन आप हमारी बात माने ही सही ये कोई जरूरी तो नही है। 
सिनेमा सब पसन्द करते है, लस्सी की तरह । तो यहाँ सिनेमा लस्सी डिपार्टमेंट में सिनेमा, वेबसिरीज के बारे मे भी मीठी और खट्टी लस्सी सर्व होती है। 
बात आती है साहब आध्यात्मिक ज्ञान की। तो हमारे यहाँ सब लोग ज्ञानी है। फिलोसोफी सब झाड़ते ही है। इसलिए हिंदी ढाबे पर एक खटिया आध्यात्म की भी लगवा दी है। बैठो और सुनो और सुनाओ। 
लेडीज लोगो की अलग ही थाली लगवाई है। फुल थाली जिसको बोलते है। उसमें उनके लिए आचार भी है, सब्जियाँ भी और एक पीस स्वीट का भी। इस सेक्शन में औरतों के लिए अलग से बात हो रही है। 
बाल बच्चे सम्भालना कम बात नही है। वैसे ही जैसे बेसन गट्टे कितनी मेहनत से बनते है। 
तो इस सेक्शन में बाल गोपाल की परवरिश आदि के बारे में पढ़ने को मिलेगा आपको। 
लिटरेचर ! हांजी लिटरेचर बन्दे है हम थोड़े से। तो इस सेक्शन में सलाद की माफ़िक आपको थोड़ा हल्का थोड़ा बारीक थोड़ा मोटा लिटरेचर पढ़ने को मिलेगा। 
बाकी आप देख लीजिए। हिंदी ढाबा है। पानी खूब पिया करे आप। और ढाबे पर आते जाते रहे, स्वास्थ्य और मन सही रहता है। 
थैंक्यू जी।